हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार , इस रिवायत को "कामिलुज़-ज़ियारात" पुस्तक से लिया गया है। इस कथन का पाठ इस प्रकार है:
:قال الامام الصادق علیهالسلام
«لَا تَدَعْ زِیَارَةَ الْحُسَیْنِ، أَمَا تُحِبُّ أَنْ تَکُونَ فِیمَنْ تَدْعُو لَهُ الْمَلَائِکَةُ؟»
इमाम जाफ़र सादिक़ (अ.स.) ने फ़रमाया:
इमाम हुसैन अ.स. की ज़ियारत को कभी न छोड़ो। क्या तुम यह पसंद नहीं करते कि तुम उन लोगों में शामिल हो जाओ जिनके लिए फ़रिश्ते दुआ करते हैं?
कामिलुज़ ज़ियारात, भाग 1,पेज 119
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